महाभारत 8.18.63
कृतवर्मा तु संक्रुद्धो भित्त्वा षष्टिभिराशुगैःधनुरेकेन चिच्छेद हसन्राजन्महारथः
kṛtavarmā tu saṃkruddho bhittvā ṣaṣṭibhirāśugaiḥdhanurekena ciccheda hasanrājanmahārathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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