महाभारत 8.18.66
वितथांस्तान्समालक्ष्य पतितांश्च महीतलेक्षुरप्रेण सुतीक्ष्णेन कार्मुकं चिच्छिदे बली
vitathāṃstānsamālakṣya patitāṃśca mahītalekṣurapreṇa sutīkṣṇena kārmukaṃ cicchide balī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें