महाभारत 8.18.72
कृतवर्मा महाराज पार्षतं निशितैः शरैःरणे विव्याध सप्तत्या स्वर्णपुङ्खैः शिलाशितैः
kṛtavarmā mahārāja pārṣataṃ niśitaiḥ śaraiḥraṇe vivyādha saptatyā svarṇapuṅkhaiḥ śilāśitaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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