महाभारत 8.18.8
ध्वजमुन्मथितं दृष्ट्वा युयुत्सुः क्रोधमूर्छितःउलूकं पञ्चभिर्बाणैराजघान स्तनान्तरे
dhvajamunmathitaṃ dṛṣṭvā yuyutsuḥ krodhamūrchitaḥulūkaṃ pañcabhirbāṇairājaghāna stanāntare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें