महाभारत 8.19.14
माधवस्य तु विद्धस्य तोमरेण महारणेप्रतोदः प्रापतद्धस्ताद्रश्मयश्च विशां पते
mādhavasya tu viddhasya tomareṇa mahāraṇepratodaḥ prāpataddhastādraśmayaśca viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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