महाभारत 8.19.59सरथं सादिनं तत्र अपरे तु महागजाःभूमावमृद्नन्वेगेन सवर्माणं पताकिनम्sarathaṃ sādinaṃ tatra apare tu mahāgajāḥbhūmāvamṛdnanvegena savarmāṇaṃ patākinamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें