महाभारत 8.19.75
एवमेष क्षयो वृत्तः कुरुपाण्डवसेनयोःअपराह्णे महाराज काङ्क्षन्त्योर्विपुलं जयम्
evameṣa kṣayo vṛttaḥ kurupāṇḍavasenayoḥaparāhṇe mahārāja kāṅkṣantyorvipulaṃ jayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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