महाभारत 8.22.28
तत्त्विदानीमतिक्रम्य मा शुचो भरतर्षभशृणु सर्वं यथावृत्तं घोरं वैशसमच्युत
tattvidānīmatikramya mā śuco bharatarṣabhaśṛṇu sarvaṃ yathāvṛttaṃ ghoraṃ vaiśasamacyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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