महाभारत 8.22.53
एवमभ्यधिकः पार्थाद्भविष्यामि गुणैरहम्शल्यो ह्यभ्यधिकः कृष्णादर्जुनादधिको ह्यहम्
evamabhyadhikaḥ pārthādbhaviṣyāmi guṇairahamśalyo hyabhyadhikaḥ kṛṣṇādarjunādadhiko hyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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