महाभारत 8.22.55
बाहुवीर्ये समो नास्ति मद्रराजस्य कश्चनतथास्त्रैर्मत्समो नास्ति कश्चिदेव धनुर्धरः
bāhuvīrye samo nāsti madrarājasya kaścanatathāstrairmatsamo nāsti kaścideva dhanurdharaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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