महाभारत 8.22.61
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
एवमुक्त्वा महाराज तव पुत्राः प्रतापवान्अभिगम्याब्रवीद्राजा मद्रराजमिदं वचः
evamuktvā mahārāja tava putrāḥ pratāpavānabhigamyābravīdrājā madrarājamidaṃ vacaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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