महाभारत 8.23.34
याजनाध्यापनैर्विप्रा विशुद्धैश्च प्रतिग्रहैःलोकस्यानुग्रहार्थाय स्थापिता ब्रह्मणा भुवि
yājanādhyāpanairviprā viśuddhaiśca pratigrahaiḥlokasyānugrahārthāya sthāpitā brahmaṇā bhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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