महाभारत 8.23.46
यदेव व्याहृतं पूर्वं भवता भूरिदक्षिणतदेव कुरु धर्मज्ञ मदर्थं यद्यदुच्यसे
yadeva vyāhṛtaṃ pūrvaṃ bhavatā bhūridakṣiṇatadeva kuru dharmajña madarthaṃ yadyaducyase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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