महाभारत 8.24.124
तेऽनुज्ञाता भगवता जग्मुः सर्वे यथागतम्कृतकामाः प्रसन्नेन प्रजापतिमुखाः सुराः
te'nujñātā bhagavatā jagmuḥ sarve yathāgatamkṛtakāmāḥ prasannena prajāpatimukhāḥ surāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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