महाभारत 8.24.129
इमं चाप्यपरं भूय इतिहासं निबोध मेपितुर्मम सकाशे यं ब्राह्मणः प्राह धर्मवित्
imaṃ cāpyaparaṃ bhūya itihāsaṃ nibodha mepiturmama sakāśe yaṃ brāhmaṇaḥ prāha dharmavit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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