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महाभारत 8.24.2
यदुक्तवान्पितुर्मह्यं मार्कण्डेयो महानृषिःतदशेषेण ब्रुवतो मम राजर्षिसत्तमत्वं निबोध न चाप्यत्र कर्तव्या ते विचारणा
yaduktavānpiturmahyaṃ mārkaṇḍeyo mahānṛṣiḥtadaśeṣeṇa bruvato mama rājarṣisattamatvaṃ nibodha na cāpyatra kartavyā te vicāraṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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