महाभारत 8.24.32
ते तत्त्वं सर्वमाख्याय शिरसाभिप्रणम्य चवधोपायमपृच्छन्त भगवन्तं पितामहम्
te tattvaṃ sarvamākhyāya śirasābhipraṇamya cavadhopāyamapṛcchanta bhagavantaṃ pitāmaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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