महाभारत 8.24.37
तपः परं समातस्थुर्गृणन्तो ब्रह्म शाश्वतम्ऋषिभिः सह धर्मज्ञा भवं सर्वात्मना गताः
tapaḥ paraṃ samātasthurgṛṇanto brahma śāśvatamṛṣibhiḥ saha dharmajñā bhavaṃ sarvātmanā gatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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