महाभारत 8.24.47अमोघाय मृगाक्षाय प्रवरायुधयोधिनेदुर्वारणाय शुक्राय ब्रह्मणे ब्रह्मचारिणेamoghāya mṛgākṣāya pravarāyudhayodhinedurvāraṇāya śukrāya brahmaṇe brahmacāriṇeइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें