महाभारत 8.24.49
कुमारपित्रे त्र्यक्षाय प्रवरायुधधारिणेप्रपन्नार्तिविनाशाय ब्रह्मद्विट्संघघातिने
kumārapitre tryakṣāya pravarāyudhadhāriṇeprapannārtivināśāya brahmadviṭsaṃghaghātine
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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