महाभारत 8.24.52
ततः प्रसन्नो भगवान्स्वागतेनाभिनन्द्य तान्प्रोवाच व्येतु वस्त्रासो ब्रूत किं करवाणि वः
tataḥ prasanno bhagavānsvāgatenābhinandya tānprovāca vyetu vastrāso brūta kiṃ karavāṇi vaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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