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महाभारत 8.24.55
तानतिक्रान्तमर्यादान्नान्यः संहर्तुमर्हतित्वामृते भूतभव्येश त्वं ह्येषां प्रत्यरिर्वधे
tānatikrāntamaryādānnānyaḥ saṃhartumarhatitvāmṛte bhūtabhavyeśa tvaṃ hyeṣāṃ pratyarirvadhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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