महाभारत 8.24.5
तप उग्रं समास्थाय नियमे परमे स्थिताःतपसा कर्शयामासुर्देहान्स्वाञ्शत्रुतापन
tapa ugraṃ samāsthāya niyame parame sthitāḥtapasā karśayāmāsurdehānsvāñśatrutāpana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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