महाभारत 8.24.65
ते यूयं मे रथं चैव धनुर्बाणं तथैव चपश्यध्वं यावदद्यैतान्पातयामि महीतले
te yūyaṃ me rathaṃ caiva dhanurbāṇaṃ tathaiva capaśyadhvaṃ yāvadadyaitānpātayāmi mahītale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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