महाभारत 8.24.79
ब्रह्मदण्डः कालदण्डो रुद्रदण्डस्तथा ज्वरःपरिस्कन्दा रथस्यास्य सर्वतोदिशमुद्यताः
brahmadaṇḍaḥ kāladaṇḍo rudradaṇḍastathā jvaraḥpariskandā rathasyāsya sarvatodiśamudyatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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