महाभारत 8.24.87
स नीललोहितो धूम्रः कृत्तिवासा भयंकरःआदित्यायुतसंकाशस्तेजोज्वालावृतो ज्वलन्
sa nīlalohito dhūmraḥ kṛttivāsā bhayaṃkaraḥādityāyutasaṃkāśastejojvālāvṛto jvalan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें