महाभारत 8.24.98
देव त्वयेदं कथितं त्रिदशारिनिबर्हणम्तथा च कृतमस्माभिः प्रसन्नो वृषभध्वजः
deva tvayedaṃ kathitaṃ tridaśārinibarhaṇamtathā ca kṛtamasmābhiḥ prasanno vṛṣabhadhvajaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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