महाभारत 8.26.29
यदा श्रोष्यसि निर्घोषं विस्फूर्जितमिवाशनेःराधेय गाण्डिवस्याजौ तदा नैवं वदिष्यसि
yadā śroṣyasi nirghoṣaṃ visphūrjitamivāśaneḥrādheya gāṇḍivasyājau tadā naivaṃ vadiṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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