महाभारत 8.26.31
दृष्ट्वा कर्णं महेष्वासं युयुत्सुं समवस्थितम्चुक्रुशुः कुरवः सर्वे हृष्टरूपाः परंतप
dṛṣṭvā karṇaṃ maheṣvāsaṃ yuyutsuṃ samavasthitamcukruśuḥ kuravaḥ sarve hṛṣṭarūpāḥ paraṃtapa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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