Loading
महाभारत 8.27.22
यच्च प्रार्थयसे हन्तुं कृष्णौ मोहान्मृषैव तत्न हि शुश्रुम संमर्दे क्रोष्ट्रा सिंहौ निपातितौ
yacca prārthayase hantuṃ kṛṣṇau mohānmṛṣaiva tatna hi śuśruma saṃmarde kroṣṭrā siṃhau nipātitau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें