महाभारत 8.27.37
ईषादन्तं महानागं प्रभिन्नकरटामुखम्शशकाह्वयसे युद्धे कर्ण पार्थं धनंजयम्
īṣādantaṃ mahānāgaṃ prabhinnakaraṭāmukhamśaśakāhvayase yuddhe karṇa pārthaṃ dhanaṃjayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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