महाभारत 8.27.82
शूद्रसंस्कारको विप्रो यथा याति पराभवम्तथा ब्रह्मद्विषो नित्यं गच्छन्तीह पराभवम्
śūdrasaṃskārako vipro yathā yāti parābhavamtathā brahmadviṣo nityaṃ gacchantīha parābhavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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