महाभारत 8.28.12
तस्मै सदा प्रयच्छन्ति वैश्यपुत्राः कुमारकाःमांसोदनं दधि क्षीरं पायसं मधुसर्पिषी
tasmai sadā prayacchanti vaiśyaputrāḥ kumārakāḥmāṃsodanaṃ dadhi kṣīraṃ pāyasaṃ madhusarpiṣī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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