महाभारत 8.28.22
अथ हंसवचो मूढः कुत्सयित्वा पुनः पुनःप्रजगादोत्तरं काकः कत्थनो जातिलाघवात्
atha haṃsavaco mūḍhaḥ kutsayitvā punaḥ punaḥprajagādottaraṃ kākaḥ katthano jātilāghavāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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