महाभारत 8.28.29
तमहं पतिता काक नान्यं जानामि कंचनपत त्वमपि रक्ताक्ष येन वा तेन मन्यसे
tamahaṃ patitā kāka nānyaṃ jānāmi kaṃcanapata tvamapi raktākṣa yena vā tena manyase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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