महाभारत 8.28.31एकेनैव शतस्यैकं पातेनाभिभविष्यतिहंसस्य पतितं काको बलवानाशुविक्रमःekenaiva śatasyaikaṃ pātenābhibhaviṣyatihaṃsasya patitaṃ kāko balavānāśuvikramaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें