महाभारत 8.28.45
बहूनि पतनानि त्वमाचक्षाणो मुहुर्मुहुःपतस्यव्याहरंश्चेदं न नो गुह्यं प्रभाषसे
bahūni patanāni tvamācakṣāṇo muhurmuhuḥpatasyavyāharaṃścedaṃ na no guhyaṃ prabhāṣase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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