महाभारत 8.28.56
द्रोणद्रौणिकृपैर्गुप्तो भीष्मेणान्यैश्च कौरवैःविराटनगरे पार्थमेकं किं नावधीस्तदा
droṇadrauṇikṛpairgupto bhīṣmeṇānyaiśca kauravaiḥvirāṭanagare pārthamekaṃ kiṃ nāvadhīstadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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