महाभारत 8.28.57
यत्र व्यस्ताः समस्ताश्च निर्जिताः स्थ किरीटिनासृगाला इव सिंहेन क्व ते वीर्यमभूत्तदा
yatra vyastāḥ samastāśca nirjitāḥ stha kirīṭināsṛgālā iva siṃhena kva te vīryamabhūttadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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