महाभारत 8.28.62
सततं च तदश्रौषीर्वचनं द्रोणभीष्मयोःअवध्यौ वदतोः कृष्णौ संनिधौ वै महीक्षिताम्
satataṃ ca tadaśrauṣīrvacanaṃ droṇabhīṣmayoḥavadhyau vadatoḥ kṛṣṇau saṃnidhau vai mahīkṣitām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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