महाभारत 8.28.65
देवासुरमनुष्येषु प्रख्यातौ यौ नरर्षभौप्रकाशेनाभिविख्यातौ त्वं तु खद्योतवन्नृषु
devāsuramanuṣyeṣu prakhyātau yau nararṣabhauprakāśenābhivikhyātau tvaṃ tu khadyotavannṛṣu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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