महाभारत 8.29.37
ततोऽब्रवीन्मां याचन्तमपराद्धं प्रयत्नतःव्याहृतं यन्मया सूत तत्तथा न तदन्यथा
tato'bravīnmāṃ yācantamaparāddhaṃ prayatnataḥvyāhṛtaṃ yanmayā sūta tattathā na tadanyathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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