महाभारत 8.3.10
गर्हयित्वात्मनो बुद्धिं शकुनेः सौबलस्य चध्यात्वा च सुचिरं कालं वेपमानो मुहुर्मुहुः
garhayitvātmano buddhiṃ śakuneḥ saubalasya cadhyātvā ca suciraṃ kālaṃ vepamāno muhurmuhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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