महाभारत 8.3.5
ततस्ताः संजयो राजन्समाश्वासयदातुराःमुह्यमानाः सुबहुशो मुञ्चन्त्यो वारि नेत्रजम्
tatastāḥ saṃjayo rājansamāśvāsayadāturāḥmuhyamānāḥ subahuśo muñcantyo vāri netrajam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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