महाभारत 8.3.7
राजानं विदुरश्चापि प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम्आश्वासयामास तदा सिञ्चंस्तोयेन कौरवम्
rājānaṃ viduraścāpi prajñācakṣuṣamīśvaramāśvāsayāmāsa tadā siñcaṃstoyena kauravam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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