महाभारत 8.30.34
इति शल्य विजानीहि हन्त भूयो ब्रवीमि तेयदन्योऽप्युक्तवानस्मान्ब्राह्मणः कुरुसंसदि
iti śalya vijānīhi hanta bhūyo bravīmi teyadanyo'pyuktavānasmānbrāhmaṇaḥ kurusaṃsadi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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