महाभारत 8.30.76
प्राचीं दिशं श्रिता देवा जातवेदःपुरोगमाःदक्षिणां पितरो गुप्तां यमेन शुभकर्मणा
prācīṃ diśaṃ śritā devā jātavedaḥpurogamāḥdakṣiṇāṃ pitaro guptāṃ yamena śubhakarmaṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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