महाभारत 8.30.7
इदं तु मे त्वमेकाग्रः शृणु मद्रजनाधिपसंनिधौ धृतराष्ट्रस्य प्रोच्यमानं मया श्रुतम्
idaṃ tu me tvamekāgraḥ śṛṇu madrajanādhipasaṃnidhau dhṛtarāṣṭrasya procyamānaṃ mayā śrutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें