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महाभारत 8.30.83
शल्य उवाच · śalya uvāca
आतुराणां परित्यागः स्वदारसुतविक्रयःअङ्गेषु वर्तते कर्ण येषामधिपतिर्भवान्
āturāṇāṃ parityāgaḥ svadārasutavikrayaḥaṅgeṣu vartate karṇa yeṣāmadhipatirbhavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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