महाभारत 8.30.86
रमन्ते चोपहासेन पुरुषाः पुरुषैः सहअन्योन्यमवतक्षन्तो देशे देशे समैथुनाः
ramante copahāsena puruṣāḥ puruṣaiḥ sahaanyonyamavatakṣanto deśe deśe samaithunāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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